परिचय: चैत्र नवरात्रि का महत्व
चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना के लिए मनाया जाता है। यह नवरात्रि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होती है और राम नवमी के दिन समाप्त होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस नवरात्रि का विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है और इसे वसंत नवरात्रि भी कहा जाता है।
इस वर्ष चैत्र नवरात्रि निम्नलिखित तिथियों में मनाई जाएगी:
तिथि | दिन | देवी का स्वरूप |
---|---|---|
प्रतिपदा | 30मार्च 2025 | माता शैलपुत्री |
द्वितीया | 31 मार्च 2025 | माता ब्रह्मचारिणी |
तृतीया | 01 अप्रैल 2025 | माता चंद्रघंटा |
चतुर्थी | 02 अप्रैल 2025 | माता कूष्मांडा |
पंचमी | 02 अप्रैल 2025 | माता स्कंदमाता |
षष्ठी | 03 अप्रैल 2025 | माता कात्यायनी |
सप्तमी | 04 अप्रैल 2025 | माता कालरात्रि |
अष्टमी | 05 अप्रैल 2025 | माता महागौरी |
नवमी | 06 अप्रैल 2025 | माता सिद्धिदात्री एवं राम नवमी |

माता शैलपुत्री (प्रतिपदा) – घी का भोग लगाएं, इससे आयु में वृद्धि होती है।
माता ब्रह्मचारिणी (द्वितीया) – मिश्री या चीनी का भोग अर्पित करें, जिससे जीवन में शांति आती है।
माता चंद्रघंटा (तृतीया) – दूध और मिठाई का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
माता कूष्मांडा (चतुर्थी) – मालपुए का भोग लगाएं, जिससे बुद्धि का विकास होता है।
माता स्कंदमाता (पंचमी) – केले का भोग लगाना शुभ होता है।
माता कात्यायनी (षष्ठी) – शहद का भोग अर्पित करें।
माता कालरात्रि (सप्तमी) – गुड़ का भोग लगाएं, जिससे शत्रु बाधा समाप्त होती है।
माता महागौरी (अष्टमी) – नारियल का भोग अर्पित करें।
माता सिद्धिदात्री (नवमी) – तिल का भोग लगाना उत्तम होता है।

शुद्धता बनाए रखें – व्रत रखने वाले व्यक्ति को सात्विक जीवन अपनाना चाहिए।
मांसाहार और नशे से दूर रहें – नवरात्रि में किसी भी प्रकार के मांसाहारी भोजन, शराब और अन्य तामसिक वस्तुओं का सेवन वर्जित होता है।
फलाहार का सेवन करें – व्रत के दौरान फल, दूध, और सूखे मेवे का सेवन करें।
एक समय भोजन करें – अधिकतर लोग व्रत में एक समय भोजन करते हैं, जिसमें कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, और सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है।
पूजा और मंत्र जप करें – नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और “ॐ दुं दुर्गायै नमः” मंत्र का जप करें।
चैत्र नवरात्रि के अष्टमी और नवमी तिथियां विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती हैं। इन दिनों में कन्या पूजन किया जाता है, जिसमें 9 कन्याओं को भोजन कराकर देवी के रूप में पूजित किया जाता है।

सुबह और शाम दीप जलाकर देवी की आरती करें।
लाल और पीले वस्त्र पहनकर पूजा करें।
घर को साफ-सुथरा रखें और देवी के लिए एक विशेष स्थान बनाएं।
कलश स्थापना करें और घटस्थापना के समय मां दुर्गा का आह्वान करें।
माता रानी को चुनरी अर्पित करें और हल्दी-कुमकुम से पूजन करें।
किसी भी प्रकार की नकारात्मक सोच न रखें।
बाल कटवाने, नाखून काटने और शेविंग से बचें।
झूठ, छल-कपट, क्रोध और ईर्ष्या से दूर रहें।
घर में प्याज-लहसुन का सेवन न करें।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से – नवरात्रि के दौरान किए गए व्रत और पूजा व्यक्ति के मन और आत्मा को शुद्ध करते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से – इस मौसम में मौसम परिवर्तन होता है, और व्रत रखने से शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिलती है।
अगर धन की समस्या है तो मां लक्ष्मी को कमल का फूल अर्पित करें।
घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाएं।
व्यवसाय में सफलता के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
शत्रु बाधा निवारण के लिए सप्तशती के कीलक मंत्र का जाप करें।
चैत्र नवरात्रि आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और शारीरिक शुद्धि का पर्व है। इस दौरान किए गए व्रत, पूजा और दान-पुण्य से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यदि श्रद्धा और विश्वास के साथ नवरात्रि मनाई जाए, तो देवी मां का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होता है।